हिंदी हमारी ‘मात्र’ भाषा नहीं, राष्ट्र भाषा भी है. इस ने देश को एक सूत्र में पिरोने और आज़ादी की लड़ाई को नई ताकत देने में भी बहुत अहम भूमिका निभाई है. आम जनता की भावना के बावज़ूद, आज़ादी के सत्तर सालों बाद भी, कुछ कारणो से हिंदी को उस ऊंचे मुकाम पे नहीं ले जाया जा सका है.
आख़िर वो कारण कौनसे हैं? कौन लोग हैं जिन्होने हिंदी का कबाड़ा किया है? इस पर पेश है हमारी धोबी घाट स्पेशल वन लाइनर्स सीरीज़ ! जिसे पढ़कर आप ना सिर्फ़ पेट के बल हँसेंगे, बल्कि सोचने पर भी विवश होंगे. अंग्रेज़ी, उर्दू या किसी अन्य भाषा से हमें कोई बैर नहीं,लेकिन हिंदी की दुर्दशा हमें बिल्कुल बर्दाश्त नही!
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