भारत की सियासत और बॉलीवुड ही नहीं, बल्कि खेल भी सेकुलरिज्म की महामारी का शिकार हैं. और भारत में सेकुलरिज्म का एक ही मतलब है.. मुस्लिमपरस्ती! आइए, कुछ तथ्यो के साथ इस पर नज़र डालते हैं.
इस्लाम पहले, खेल भावना बाद में
ज़हीर खान चले थे फलस्तीन का गाज़ा बचाने
युसुफ योहन्ना को बदलना पड़ा अपना धर्म !
परवेज़ रसूल के लिए रैना और जड़ेजा की कुर्बानी देने का इरादा!
26/11 के बाद पाकिस्तान के साथ नहीं खेलने पर शाहरुख की
पीड़ा !
सानिया मिर्ज़ा के लिए सरिता देवी की बलि !
उमर अब्दुल्ला के कश्मीरियत के बदले मज़हबी मंसूबे, खेल जाए भाड़ में !
अज़हरुद्दीन को अगले पीर बाबा के रूप में स्थापित
करने की बॉलीवुडी सियासत!
हिंदुस्तान का खाया-पिया, लेकिन
पाकिस्तान प्यारा रहा!
चक दे इंडिया के बहाने, अल्पसंख्यक
का विक्टिम कार्ड, असली कोच नेगी को भूला दिया!
मैच फिक्सिंग का इनाम, कांग्रेस का टिकट
!
नेशनल लेवल की शूटर तारा सचदेव हुई लव जेहाद का
शिकार, लेकिन सेकुलर ख़ामोश!
ये
प्रस्तुति एक विश्वसनीय वेबसाइट indiafacts पर प्रकाशित मैनेजमेंट गुरु संदीप सिँह के आलेख पर
आधारित है.















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